भूमिका
आज की आधुनिक जीवनशैली, गलत खान-पान, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण रोगों का बढ़ना आम हो गया है। ऐसे समय में आयुर्वेद हमें प्रकृति के अनुरूप जीने और निरोगी रहने का मार्ग दिखाता है। आयुर्वेद केवल औषधियों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है।
आयुर्वेद के दोहे और सूत्र छोटे होने के बावजूद गहरे अर्थ और व्यावहारिक संदेश देते हैं। यदि इन्हें जीवन में उतार लिया जाए, तो स्वस्थ और दीर्घायु जीवन संभव है।
इस ब्लॉग में हम निरोगी रहने के प्रमुख आयुर्वेदिक नुस्खे, दोहों के माध्यम से जानेंगे।
निरोगी रहने के आयुर्वेदिक दोहे:-
सुबह खाइये कुंवर सा, दोपहर यथा नरेश।
भोजन लीजिए रात में, जैसे रंक सुरेश।। १
प्रातःकाल फल का रस लो, दोपहर लस्सी छाछ।
रात्रि समय दूध पीयो, सभी रोगों का नाश।। २
घूंट-घूंट पानी पियो, रह तनाव से दूर।
एसिडिटी या मोटापा, होवें चकनाचूर।। ३
चूर्ण बनाकर आंवले, खाओ बारहमास।
नहीं जरूरत वैद्य की, जब-तक तन में श्वास।। ४
लौकी का रस पीजिये, चोकर युक्त पिसान।
तुलसी, गुड़, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान।। ५
दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय।
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय।। ६
रोज मुलहठी चूसिये, कफ बाहर आ जाय।
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय।। ७
भोजन करके खाइये, सौंफ, गुड़, अजवान।
पत्थर भी पच जायेगा, जाने सकल जहान।। ८
अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय।
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय।। ९
तुलसी का पत्ता करे, यदि हरदम उपयोग।
मिट जाते हर उम्र में, शरीर के सारे रोग।। १०
रात्रि-भोजन बाद में, थोड़ा सा गुण खाय।
पाचन भी दुरुस्त रहे, बुरी डकार न आय।। ११
जो नहावें गरम जल से, तन-मन हो कमजोर।
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुँ ओर।। १२
बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल।
यूकेलिप्टिस का तेल लें, सूंघें डाल रुमाल।। १३
ऊर्जा मिलती है बहुत, पियें गुनगुना नीर।
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाये हर पीर।। १४
ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल।
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल।। १५
प्रातःकाल पानी पीयें, घूंट-घूंट कर आप।
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप।। १६
रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर।
लीवर हो बेहतर आपका, टीबी भी हो दूर।। १७
चैत्र मास में नीम की, पत्ती हर दिन खावे।
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे।। १८
गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम।
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम।। १९
सौ वर्षों तक वह जीये, जो लेते नाक से सांस।
अल्पकाल जीवे वह, जो मुंह से श्वासोच्छवास।। २०
शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम।
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम।। २१
भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार।
डाक्टर, ओझा, वैद्य का, लुट जाये व्यापार।। २२
लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह।
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह।। २३
भोजन करें धरती पर, अलथी-पलथी मार।
चबा-चबा कर खाइये, वैद्य न झांके द्वार।। २४
तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल।
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल।। २५
भोजन करके जोहिये, केवल घंटा-डेढ़।
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड़।। २६
थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग।
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग।। २७
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल।
अपच, आंख के रोग संग, तन भी रहे निढाल।। २८
अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय।
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय।। २९
फल या मीठा खाइके, तुरंत न पीजै नीर।
ये सब छोटी आंत में बनते विषधर तीर।। ३०
कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट।
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट।। ३१
एल्यूमीनियम के पात्र का, करता है जो उपयोग।
आमंत्रित करता सदा, वह अड़तालीस रोग।। ३२
दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ।
दालचीनी का पाउडर, लें पानी के साथ।। ३३
अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल।
इसका सेवन आप करें, नहीं होगा हार्ट फेल।। ३४
ऐलोवेरा अरु आँवला, करे खून में वृद्धि।
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि।। ३५
कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय।
अजवाइन की भाप लें, कफ बाहर आ जाय।। ३६
अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम।
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम।। ३७
छाछ, हींग, सेंधा नमक, दूर करे सब रोग।
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग।। ३८
हृदय रोग से आपको, यदि बचना है श्रीमान।
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान।। ३९
बासी पानी जो पीये, सोंधी हर्रे खाय।
नीम की दतुअन जो करे, ता घर वैद्य न जाय।। ४०
प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस।
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश।। ४१
पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सुजान।
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान।। ४२
अलल्सुबह जो खाये हवा, उसे काम न आये दवा।
चिंता करे न सोती बेरा। एक नींद में होय सबेरा।। ४३
रक्तचाप बढ़ने लगे, तब मत सोचो भाय।
खाइके सौगंध रामकी, तुरंत छोड़ दो चाय।। ४४
निष्कर्ष
निरोगी रहने के आयुर्वेदिक दोहे केवल श्लोक नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। यदि हम इन सूत्रों को अपनी दिनचर्या, भोजन और सोच में शामिल कर लें, तो बिना दवा के भी स्वस्थ रह सकते हैं।
👉 याद रखें – “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और सफल जीवन संभव है।”
स्रोत: रुपेश पंचांग (हिन्दी कैलेंडर) एवं गूगल
(अस्वीकरण: स्वास्थ्य से संबंधित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा-राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें।)
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