15 जनवरी 2026

सस्टेनेबल लिविंग क्या है और इसे कैसे अपनाएँ?

भूमिका (Introduction)

आज की तेज़ रफ्तार और उपभोक्तावादी जीवनशैली ने हमें सुविधाएँ तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके साथ-साथ प्रकृति का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में सस्टेनेबल लिविंग की उपयोगिता काफी बढ़ जाती है। 

सस्टेनेबल लिविंग केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का जीवन दर्शन है। यह हमें सिखाता है कि कैसे हम अपनी ज़रूरतें पूरी करते हुए भी प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों का ध्यान रखें।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे — सस्टेनेबल लिविंग क्या है? यह क्यों जरूरी है? इसे हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कैसे अपनाएँ? तथा भारतीय संदर्भ में इसके व्यावहारिक उपाय क्या है? 

🌍 सस्टेनेबल लिविंग क्या है? (What is Sustainable Living?)

सस्टेनेबल लिविंग का शाब्दिक अर्थ है— सतत या टिकाऊ जीवनशैली। अर्थात् ऐसी जीवनशैली अपनाना जिसमें हम प्राकृतिक संसाधनों का सीमित, संतुलित और जिम्मेदार तरीके से उपयोग करें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहें और उन्हें अपनी आवश्यकताओं के साथ समझौता न करना पड़े।

मुख्य बिंदु:

  • प्राकृतिक संसाधनों का समझदारी से उपयोग। 
  • ऊर्जा और पानी की बचत। 
  • प्लास्टिक व प्रदूषण को कम करना। 
  • पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग। 
  • पुन: उपयोग (Reuse) और पुनर्चक्रण (Recycle) के सिद्धांत को व्यवहार में लाना। 

🌱 सस्टेनेबल लिविंग के तीन मुख्य स्तंभ

1️⃣ पर्यावरणीय संतुलन (Environmental Sustainability)

  • पानी, जंगल, हवा और मिट्टी की रक्षा। 
  • प्रदूषण कम करना। 
  • जैव-विविधता को बचाना। 

2️⃣ सामाजिक जिम्मेदारी (Social Sustainability)

  • स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
  • समानता और न्याय
  • समुदाय का विकास

3️⃣ आर्थिक संतुलन (Economic Sustainability)

  • ज़रूरत के अनुसार खर्च
  • स्थानीय रोजगार
  • दीर्घकालिक आर्थिक सोच

सस्टेनेबल लिविंग क्यों जरूरी है?

१. प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं

धरती पर उपलब्ध पानी, तेल, खनिज और जंगल आदि अनंत नहीं हैं, ये भी एक दिन समाप्त हो जाने वाले हैं। यदि आज हम सावधान नहीं हुए, तो भविष्य में गंभीर संकट आएगा।

२. बढ़ता प्रदूषण

हवा, पानी और मिट्टी का प्रदूषण, मानव-स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है।

३. जलवायु परिवर्तन

ग्लोबल वॉर्मिंग, बाढ़, सूखा और असामान्य मौसम — ये सब असंतुलित जीवनशैली के परिणाम हैं।

४. आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी

हमें केवल आज नहीं, बल्कि कल के बच्चों के बारे में भी सोचना है।

🏡 सस्टेनेबल लिविंग कैसे अपनाएँ? (Practical Tips)

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल —हम इसे अपनाएँ कैसे? तो आइए इसे अलग-अलग क्षेत्रों में समझते हैं।

♻️ १. कम उपभोग और स्मार्ट खरीदारी

  • ज़रूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। 
  • "Use & Throw" संस्कृति से बचें। 
  • टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले उत्पाद खरीदें।
  •  स्थानीय और हस्तनिर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता दें। 

👉 याद रखें: सस्टेनेबल लिविंग की शुरुआत “ना” कहने से होती है।

२. कचरा कम करें (Formula of Reduce, Reuse & Recycle)

Reduce (कम करें)- प्लास्टिक बैग, बोतल और पैकेजिंग से बचें। 

Reuse (पुनः उपयोग)- कपड़े, डिब्बे, कागज का इस्तेमाल करें। 

Recycle (रीसायकल)- सूखा और गीला कचरा, अलग-अलग रखें। 

👉 Zero Waste Lifestyle की दिशा में यह पहला कदम है।

💧 ३. पानी की बचत करें

  • नल खुला न छोड़ें। 
  • वर्षा-जल संचयन (Rainwater Harvesting) अपनाएँ। 
  • RO मशीन के वेस्ट वाटर का उपयोग करें। 
  • पौधों को सुबह या शाम पानी दें। 

४. ऊर्जा संरक्षण और ग्रीन एनर्जी

  • अनावश्यक लाइट और पंखे बंद रखें। 
  • LED बल्ब का प्रयोग करें। 
  • सोलर पैनल अपनाने का प्रयास करें। 
  • बिजली की खपत पर नज़र रखें। 

🌿 ५. पर्यावरण-अनुकूल खान-पान

  • स्थानीय और मौसमी भोजन करें। 
  • फूड वेस्ट कम करें। 
  • ऑर्गेनिक और प्राकृतिक आहार को अपनाएँ। 
  • सप्ताह में कुछ दिन शाकाहारी भोजन करें। 

🛍️ ६. प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली

  • कपड़े या जूट के थैले रखें। 
  • स्टील / कांच की बोतल का उपयोग। 
  • सिंगल-यूज प्लास्टिक से बचें। 

🚲 ७. परिवहन में बदलाव

  • पैदल चलें या साइकिल अपनाएँ। 
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग। 
  • कार-पूलिंग करें। 

🌱 ८. पेड़ लगाएँ और प्रकृति से जुड़ें

  • हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएँ। 
  • घर में गार्डन या किचन गार्डन बनाएँ। 
  • बच्चों को भी प्रकृति से जोड़ें। 

🇮🇳 भारतीय संदर्भ में सस्टेनेबल लिविंग

भारत की पारंपरिक जीवनशैली पहले से ही सस्टेनेबल थी; जैसे-

  • मिट्टी के बर्तन
  • सीमित संसाधनों में संतोष
  • प्रकृति-पूजा

हमें आज आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों की ओर लौटने की आवश्यकता है।

🌟 सस्टेनेबल लिविंग के फायदे: इसके बहुत सारे फायदे हैं, जैसे-

  • बेहतर स्वास्थ्य
  • मानसिक शांति
  • कम खर्च
  • स्वच्छ पर्यावरण
  • सुरक्षित भविष्य

सस्टेनेबल लिविंग से जुड़ी गलतफहमियाँ:

  • यह महंगा है। 
  • यह मुश्किल है। 
  • अकेले व्यक्ति से फर्क नहीं पड़ता। 

✔️ सच्चाई यह है कि छोटे-छोटे कदम मिलकर ही बड़ा बदलाव लाते हैं।

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

सस्टेनेबल लिविंग कोई बोझ नहीं, बल्कि एक समझदार और संतुलित जीवनशैली है।

हमें सब कुछ एक साथ बदलने की जरूरत नहीं है। इसके लिए आप बस आज से एक छोटा कदम उठाइए — एक प्लास्टिक बैग कम, एक लाइट बंद और एक पौधा अधिक।

यही हमारे-आपके छोटे कदम, धरती को बचाने की सबसे बड़ी शुरुआत हैं

🙋‍♂️ FAQs

Q1. सस्टेनेबल लिविंग क्या है?

👉 प्रकृति और भविष्य को ध्यान में रखते हुए जीवन जीने की शैली।

Q2. क्या सस्टेनेबल लिविंग आम लोगों के लिए संभव है?

👉 हाँ, यह छोटे दैनिक बदलावों से बिल्कुल संभव है।

Q3. सस्टेनेबल जीवनशैली के सबसे आसान कदम क्या हैं?

👉 पानी-बिजली बचाना, कचरा कम करना और प्लास्टिक से बचना।

 Must read:


13 जनवरी 2026

कल्याण क्या है? जीवन, समाज और मानवता के सर्वांगीण विकास की कुंजी

भूमिका (Introduction)

मानव-जीवन का अंतिम उद्देश्य केवल धन, पद या भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं है, बल्कि सुख, शांति और संतुलन के साथ जीवन जीना है। जीवन की यही अवस्था 'कल्याण' कहलाती है।

कल्याण एक ऐसा व्यापक शब्द है जो व्यक्ति, समाज और संपूर्ण मानवता के हित से जुड़ा हुआ है। जब व्यक्ति स्वयं सुखी होता है और दूसरों की भलाई में योगदान देता है, तभी सच्चा कल्याण संभव होता है।

कल्याण का अर्थ क्या है?

कल्याण का शाब्दिक अर्थ है – भलाई, मंगल, हित, सुख-शांति की अवस्था। सरल शब्दों में कहें तो, "ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित हो — वही कल्याण है।" 

हमारे शास्त्रों में कहा गया है, “परहित सरिस धर्म नहीं भाई” अर्थात् परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। 

कल्याण के प्रमुख प्रकार

1️⃣ व्यक्तिगत कल्याण: व्यक्ति का स्वयं के प्रति सजग रहना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, सकारात्मक सोच रखना और आत्मविकास करना, व्यक्तिगत कल्याण कहलाता है। 

उदाहरण: कल्याण को प्राप्त मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा होता है।उसके अंदर मानसिक शांति विराजती है और उसे आत्म-संतुष्टि रहती है। 

2️⃣ मानसिक कल्याण: आज की भागदौड़-भरी जिंदगी में मानसिक कल्याण सबसे अधिक आवश्यक हो गया है। स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन की नींव है। मानसिक कल्याण के प्रमुख उपाय –

  • ध्यान और योग
  • नकारात्मक विचारों से दूरी
  • पर्याप्त नींद और
  • आत्मचिंतन

3️⃣ शारीरिक कल्याण: स्वास्थ्य के बिना कोई भी सुख स्थायी नहीं हो सकता। शारीरिक कल्याण के लिए कुछ जरूरी बातें निम्न हैं –

  • संतुलित आहार
  • नियमित व्यायाम
  • नशे से दूरी और
  • स्वच्छ जीवनशैली

4️⃣ सामाजिक कल्याण: जब व्यक्ति समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझता है और दूसरों की सहायता करता है, तभी सामाजिक कल्याण होता है। सामाजिक कल्याण के उदाहरण–

  • गरीबों की सहायता
  • शिक्षा को बढ़ावा
  • पर्यावरण संरक्षण
  • समानता और न्याय

5️⃣ आध्यात्मिक कल्याण: आध्यात्मिक कल्याण, आत्मा की शांति से जुड़ा है। आध्यात्मिक कल्याण से बहुत लाभ होते हैं, जैसे–

  • जीवन में स्थिरता
  • धैर्य और संतोष
  • अहंकार से मुक्ति
  • करुणा और प्रेम की भावना

मानव जीवन में कल्याण का महत्व

कल्याण के बिना जीवन अधूरा है। यह केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी सशक्त बनाता है। इसके महत्व निम्न हैं –

  • जीवन में संतुलन बनाए रखता है। 
  • रिश्तों को मजबूत करता है। 
  • समाज में सौहार्द बढ़ाता है। 
  • सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है। 

सच्चा कल्याण क्या है?

आज लोग अक्सर सुख और कल्याण को एक मान लेते हैं, जबकि दोनों में बुनियादी अंतर है।

          सुख                                    कल्याण

अस्थायी होता है।                        स्थायी होता है। 

केवल स्वयं तक सीमित               सभी के लिए होता है। 

   भौतिक                                मानसिक व आत्मिक

👉 दूसरों की भलाई में जो सुख मिले, वही सच्चा कल्याण है।

कल्याण और नैतिकता का संबंध: नैतिक जीवन जीना ही कल्याण का मूल आधार है।

नैतिक मूल्यों से कल्याण:

  • सत्य
  • ईमानदारी
  • करुणा
  • परोपकार

नैतिकता के बिना कल्याण संभव नहीं।

आधुनिक जीवन में कल्याण की आवश्यकता

आज तनाव, अवसाद और अकेलापन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कल्याण की अवधारणा और भी प्रासंगिक हो जाती है।

आधुनिक जीवन में लोक-कल्याण के उपाय:

  • जरूरतमंदों की मदद। 
  • असहाय, दीन-दुखियों की सेवा। 
  • शिक्षा का मुफ्त प्रसार। 
  • नि:स्वार्थ प्रेम और उपकार। 
  • पथ से भटके लोगों को सही राह पर लाना।
  • लोगों के बुरे समय में प्रोत्साहित करना और यथासंभव सहायता करना। 
  • अपने ज्ञान, समझ और अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करना। 
  • पर्यावरण संरक्षण करना। 
  • प्रेमपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार। 
  • दूसरों की गलतियों को क्षमा करना। 
  • सकारात्मक वातावरण का निर्माण। 

आत्मकल्याण से समाज कल्याण

जब व्यक्ति स्वयं संतुलित और सुखी होता है, तभी वह समाज के लिए कुछ कर पाता है। अर्थात्-

स्वस्थ व्यक्ति स्वस्थ परिवार → स्वस्थ समाज → सशक्त राष्ट्र

निष्कर्ष (Conclusion):

कल्याण कोई एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।यह हमें सिखाता है कि केवल अपने बारे में न सोचकर, दूसरों की भलाई में भी अपना सुख खोजें। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर कल्याण को अपनाए, तो समाज स्वतः ही सुखी, शांत और समृद्ध बन सकता है।

FAQ 

Q1. कल्याण क्या है?

कल्याण वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित होता है।

Q2. सच्चा कल्याण कैसे प्राप्त करें?

सकारात्मक सोच, सेवा-भावना, स्वस्थ जीवनशैली और आत्मिक विकास से सच्चा कल्याण संभव है।

Q3. क्या कल्याण केवल स्वयं के लिए होता है?

नहीं, सच्चा कल्याण स्वयं के साथ-साथ समाज और मानवता की भलाई से जुड़ा होता है।

Must read:


3 जनवरी 2026

आधुनिक लाइफस्टाइल: संतुलित, स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के आसान तरीके

भूमिका (Introduction):

आज की तेज़ रफ्तार भरी दुनियाँ में लाइफस्टाइल केवल पहनावे या खान-पान तक सीमित नहीं रह गया है। यह हमारे सोचने के तरीके, रहन-सहन की शैली, आदतों, दिनचर्या, मानसिकता और जीवन मूल्यों का समग्र रूप है। 

आधुनिक लाइफस्टाइल ने हमें सुविधाएँ तो दी हैं, लेकिन साथ ही तनाव, अवसाद, अकेलापन और असंतुलन भी बढ़ाया है।अगर आपके जीवन में शांति और सुकून नहीं है, तो आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलने की ज़रूरत है। 

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि अच्छी लाइफस्टाइल क्या होती है, इसके विभिन्न पहलू कौन-कौन से हैं, और कैसे हम छोटे-छोटे बदलावों से एक बेहतर, संतुलित और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

लाइफस्टाइल क्या है? (What is Lifestyle?)

लाइफस्टाइल का अर्थ है — 

  • हम कैसे जीते हैं,  
  • क्या खाते हैं,    
  • कैसे सोचते हैं,
  • कैसे काम करते हैं, 
  • और कैसे अपने समय व रिश्तों को सँभालते हैं।

आसान शब्दों में कहें तो, "लाइफस्टाइल हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार और जीवन-मूल्यों का प्रतिबिंब होती है।"

आधुनिक लाइफस्टाइल की विशेषताएँ:

१. तेज़ जीवन गति: आज जीवन की गति बहुत तेज़ हो गयी है। हर व्यक्ति काम, पैसा, सफलता, शोहरत, प्रतिस्पर्धा के पीछे बेतहाशा दौड़ रहा है। 

२. टेक्नोलॉजी पर निर्भरता: मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया, हमारी लाइफस्टाइल के अहम हिस्सा बन चुके हैं।

३. सुविधाजनक जीवन: आधुनिक मशीनें और टेक्नोलॉजी ने जीवन को आसान और आरामदायक तो बना दिया है, लेकिन शारीरिक गतिविधि कम हो गई है।

४. तनाव और मानसिक दबाव: काम का दबाव, दिखावटी जीवन और औरों से तुलना ने मानसिक-तनाव को बढ़ा दिया है।

खराब लाइफस्टाइल के दुष्परिणाम:

शारीरिक समस्याएँ: खराब लाइफस्टाइल के कारण आज मोटापा, डायबिटीज़, हृदय रोग, अनिद्रा की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। 

मानसिक समस्याएँ: जैसे- तनाव, चिंता, अवसाद और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएँ आम हैं। 

सामाजिक समस्याएँ: रिश्तों में दूरी, अकेलापन, खून के रिश्तों में मनमुटाव और आपसी संवाद की कमी आदि। 

स्वस्थ लाइफस्टाइल के मुख्य स्तंभ:

१. संतुलित दिनचर्या (Balanced Daily Routine):

एक अच्छी लाइफस्टाइल की नींव अनुशासित दिनचर्या पर टिकी होती है। इसमें शामिल होता है-

  • समय पर सोना और समय पर जगना।                       
  • काम, आराम और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाना। 

सुबह जल्दी उठना न केवल शरीर के लिए बल्कि मन के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

२. स्वस्थ खान-पान (Healthy Diet) :

कहा जाता है, "जैसा अन्न वैसा मन।" अर्थात् आहार का शरीर और मन, दोनों पर प्रभाव पड़ता है। अत:

  • घर का बना ताज़ा और सादा भोजन खायें।
  • भोजन में हरी सब्जियाँ, फल और दालें प्रचुर मात्रा में लें।  
  • पर्याप्त पानी पियें और जंक फूड से तो दूरी बनायें। 

ध्यान रखें- स्वस्थ लाइफस्टाइल की राह प्रायः आपकी रसोई से होकर गुजरती है।

३. नियमित व्यायाम और योग (Exercise & Yoga):

स्वस्थ रहने के लिए महंगे जिम की नहीं, बल्कि नियमितता (Regularity) की ज़रूरत होती है। इसके लिए आपको नियमित रूप से-

  • रोज़ ३० मिनट पैदल चलें।    
  • कुशल प्रशिक्षक के निर्देशन में योग और प्राणायाम करें। 
  • हल्का व्यायाम करें। 

योग न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलित करता है।

४. मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच:

आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य जो सबसे जरूरी है, लोग उसे ही उपेक्षित करते हैं। इसके लिए आप-

  • नकारात्मक सोच से बचें। 
  • दूसरों से अपनी तुलना करना छोड़ें। 
  • कृतज्ञता का भाव रखें। 
  • ध्यान (Meditation) करें। 

सच मानिये- खुशी परिस्थितियों में नहीं, आपकी सोच में छिपी होती है।

५. डिजिटल लाइफस्टाइल में संतुलन:

आज के समय में मोबाइल और सोशल मीडिया ज़रूरी हैं, लेकिन इसका आदती न बनें। इनका सीमित उपयोग ही सही है; इसलिए-

  • स्क्रीन टाइम कम करें। 
  • सोने से पहले मोबाइल न देखें। 
  • वास्तविक रिश्तों को प्राथमिकता दें। 

सादगी भरी लाइफस्टाइल का महत्व:

आज दिखावे की होड़ ने जीवन को जटिल बना दिया है। सादगी हमें सिखाती है:

  • आप जैसे भी हैं; खुश रहें। 
  • कम में भी संतोष करना। 
  • दिखावे से दूर रहना। 
  • वास्तविक खुशी पर ध्यान देना। 

"सादा जीवन, उच्च विचार"— यही संतुलित लाइफस्टाइल का मूल मंत्र है।

रिश्ते और लाइफस्टाइल:

एक अच्छी लाइफस्टाइल में रिश्तों का विशेष स्थान होता है, इसलिए आप-

  • परिवार को उचित समय दें। 
  • मित्रों से संवाद रखें। 
  • बुज़ुर्गों का सम्मान करें। 

याद रखें — सफलता तब सार्थक होती है, जब उसे अपनों के साथ बाँटा जाए।

काम और निजी जीवन में संतुलन (Work-Life Balance):

आज की लाइफस्टाइल में सबसे बड़ी चुनौती है — वर्क-लाइफ बैलेंस। इसके लिए आप-

  • अपने काम को जीवन पर बोझ न बनने दें। 
  • काम से ब्रेक लें और छुट्टियाँ लें। 
  • खुद के लिए समय निकालें। 

ध्यान रखें- काम ज़रूरी है, लेकिन आपका जीवन उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। 

पर्यावरण-अनुकूल लाइफस्टाइल:  (Eco-Friendly Lifestyle):

अच्छी लाइफस्टाइल वही है जो प्रकृति के अनुकूल हो। इसके अन्तर्गत आपको ये काम करने होंगे-

  • प्लास्टिक का कम उपयोग। 
  • पानी और बिजली की बचत। 
  • पेड़-पौधों से जुड़ाव। 

प्रकृति से जुड़ाव जीवन में शांति लाता है।

छोटे बदलाव, बड़ा असर:

  • रोज सुबह १० मिनट ध्यान। 
  • रोज़ एक अच्छी किताब के कुछ पन्ने पढ़ना। 
  • कृतज्ञता लिखने की आदत। 
  • अनावश्यक खर्च से बचाव। 

ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी पूरी लाइफस्टाइल बदल सकते हैं।

आज की युवा पीढ़ी और लाइफस्टाइल:

आज युवा पीढ़ी ऊर्जावान है, लेकिन उन्हें सही दिशा की ज़रूरत है। इसलिए-

  • लक्ष्य स्पष्ट करें। 
  • सोशल मीडिया से प्रभावित होकर आभासी जीवन न जिएँ। 
  • स्वास्थ्य और संस्कार न भूलें। 

निष्कर्ष (Conclusion):

लाइफस्टाइल कोई फैशन नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है।एक अच्छी लाइफस्टाइल वह है जिसको अपनाने से — आपका शरीर स्वस्थ रहे, मन शांत हो, रिश्ते मजबूत हों और जीवन संतुलित हो। यदि आप अपनी लाइफस्टाइल सुधार लेते हैं, तो जीवन अपने-आप बेहतर हो जाता है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न: अच्छी लाइफस्टाइल कैसे अपनाएँ?

उत्तर: संतुलित दिनचर्या, स्वस्थ खान-पान और सकारात्मक सोच से।

प्रश्न: क्या सादा जीवन आज के समय में संभव है?

उत्तर: हाँ, इच्छा और समझदारी से बिल्कुल संभव है।

प्रश्न: लाइफस्टाइल बदलने में कितना समय लगता है?

उत्तर: छोटे-छोटे कदमों से कुछ ही हफ्तों में सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं।

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30 दिसंबर 2025

विकसित भारत 2047: आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की दिशा में

भूमिका:-

भारत स्वतंत्रता के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। अब लक्ष्य है, "विकसित भारत 2047", अर्थात् ऐसे विकसित भारत का निर्माण जो आत्मनिर्भर, समृद्ध, न्यायसंगत, और तकनीकी रूप से वैश्विक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभा सके।

Source: Youth Ki Awaj

यह लक्ष्य केवल सरकार की योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देश के हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है—किसान, युवा, महिला, उद्यमी, शिक्षक और श्रमिक सभी इस विकास की परिवर्तन-यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। 

आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल क्रांति, शिक्षा और कौशल-विकास, स्वस्थ अर्थव्यवस्था तथा सतत विकास जैसे मूल स्तंभ, विकसित भारत की नींव को मज़बूत करते हैं।

१. विकसित भारत का अर्थ: केवल आर्थिक ही नहीं, समग्र विकास

समग्र विकास का मतलब सिर्फ ऊँची-ऊँची इमारतें या बढ़ता GDP नहीं होता। विकसित भारत का अर्थ है; जहाँ —

  • हर नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान मिले।
  • हर गाँव तक आधुनिक सुविधाएँ पहुँचें। 
  • हर युवा को अवसर और पहचान मिले।  
  • हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बने। 

२. भारत की वर्तमान स्थिति और २०४७ तक के विकास के अनुमानित आंकड़े:

विकिपीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था, सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि क्रय-शक्ति समता की दृष्टि से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 

एक रेटिंग एजेंसी अर्न्स्ट एंड यंग (EY) के अनुसार, सन् २०४७ तक भारत की इकोनॉमी ५.२५ गुना बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन २१ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय २.५ लाख रुपये से बढ़कर १३.५ रूपये लाख हो जायेगी। सन् २०४७ तक देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था ४.१८ ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर २६ ट्रिलियन डॉलर हो सकती है। 

EY का ये भी मानना है कि भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। 

डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं ने देश को नई ऊर्जा दी है।  अंतरिक्ष, रक्षा, कृषि, और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। करोड़ों लोगों को आवास, बिजली, पानी और बैंकिंग जैसी सुविधाएँ मिली हैं।

३. 2047 तक का लक्ष्य: 

भारत का लक्ष्य है — “2047 तक एक ऐसे भारत का निर्माण जो आर्थिक रूप से सशक्त, सामाजिक रूप से समान, और पर्यावरण की दृष्टि से संतुलित हो।” इस दृष्टि में शामिल हैं;

  • हर नागरिक की भागीदारी।
  • तकनीकी और नवाचार आधारित विकास। 
  • सशक्त शासन प्रणाली। 
  • सतत (Sustainable) अर्थव्यवस्था। 
  • सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का संरक्षण। 

४. आत्मनिर्भर भारत: 2047 की नींव

आत्मनिर्भर-भारत अभियान ने देश में स्वदेशी उत्पादन, नवाचार और कौशल विकास की भावना जगाई है। छोटे उद्योगों और एमएसएमई. को प्रोत्साहन मिल रहा है। 

भारत अब केवल आयातक ही नहीं, निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। कृषि, औद्योगिक उत्पादन और डिजिटल सेवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।

५. शिक्षा और कौशल विकास: विकसित समाज की कुंजी 

2047 के भारत में शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि कौशल और नवाचार की पहचान होगी। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) ने शिक्षा-प्रणाली को लचीला और व्यवहारिक बनाया है। डिजिटल लर्निंग, स्किल ट्रेनिंग और उद्यमिता, अब शिक्षा का हिस्सा बन चुकी हैं। युवाओं को रोजगार नहीं, रोजगार-सृजन की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।

6. तकनीकी भारत: डिजिटल से ग्लोबल तक 

भारत तकनीकी-क्रांति के केंद्र में है। UPI, आधार, और डिजिटल गवर्नेंस ने दुनियाँ को भारत की क्षमता दिखाई है। AI, Robotics, Quantum Computing, और 5G जैसी तकनीकें भविष्य की दिशा तय कर रही हैं। 

ग्रामीण भारत तक इंटरनेट पहुँचने से हर नागरिक डिजिटल रूप से सशक्त बन रहा है। 2047 तक भारत “टेक्नोलॉजी एक्सपोर्टर नेशन” के रूप में स्थापित होगा।

७. महिला सशक्तिकरण: समता से समृद्धि की ओर 

महिलाएँ आज रक्षा, विज्ञान, राजनीति और व्यापार आदि सभी क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। सरकार ने "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ", "महिला उद्यमिता योजना", और "मातृत्व-लाभ योजना" जैसी पहलें की हैं। जब हर महिला सशक्त होगी, वास्तव में तभी भारत विकसित कहलाएगा।

८. सतत विकास: प्रकृति और प्रगति का संतुलन

विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब विकास प्रकृति के साथ तालमेल में होगा। भारत ने नेट ज़ीरो-इमिशन-2070 का लक्ष्य तय किया है। सौर-ऊर्जा, जैव-ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में बड़े कदम उठाए गए हैं। “स्वच्छ भारत मिशन” ने नागरिकों में स्वच्छता की आदत डाली है।

९. आर्थिक सुधार और विश्व में भारत की भूमिका

  • भारत अब “उभरती अर्थव्यवस्था” नहीं, बल्कि वैश्विक निर्णायक शक्ति बन रहा है।
  • G20 की अध्यक्षता से भारत की कूटनीतिक ताकत सिद्ध हुई।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
  • “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना, भारत को विश्व-नेतृत्व की दिशा में ले जा रही है।

१०. युवाशक्ति: भविष्य की सबसे बड़ी ताकत

  • भारत, विश्व का सबसे युवा देश है। “2047 का भारत, आज के युवाओं के हाथों में है।”
  • स्टार्टअप्स, इनोवेशन और डिजिटल उद्यमिता ने युवाओं को नई पहचान दी है।
  • खेल, कला, विज्ञान और सेवा क्षेत्रों में युवा, भारत की पहचान बना रहे हैं।
  • युवा अब “नौकरी खोजने” के बजाय “अवसर बनाने” की सोच रखते हैं।

११. शासन और पारदर्शिता: बेहतर प्रशासन की ओर

  • 2047 का भारत “स्मार्ट गवर्नेंस” का मॉडल बनेगा।
  • ई-गवर्नेंस, डिजिटल पारदर्शिता, और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहलें, भ्रष्टाचार को कम करने की कोशिश हैं।
  • नागरिकों की भागीदारी अब नीतियों के केंद्र में है।
  • ग्रामीण स्तर तक डिजिटल सुविधा मिलने से शासन की पहुँच हर व्यक्ति तक है।

12. चुनौतियाँ और समाधान की दिशा:-

विकसित भारत की राह में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे- बेरोजगारी, जनसंख्या दबाव, पर्यावरण संकट, और आर्थिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में असमानता। लेकिन इनसे निपटने की दिशा भी स्पष्ट है; 

  • कौशल आधारित रोजगार।
  • सतत-विकास नीति। 
  • समान अवसरों वाली शिक्षा व्यवस्था। 
  • जनभागीदारी आधारित शासन

भारत ने हमेशा हर चुनौती को अवसर में बदला है — और यही उसकी असली ताकत है।

निष्कर्ष:

“विकसित भारत 2047” कोई सपना नहीं, बल्कि यथार्थ की ओर बढ़ता संकल्प है। आज का भारत आत्मनिर्भर है, तकनीकी रूप से प्रगतिशील है, और मानवीय मूल्यों पर आधारित है।

जब देश का हर नागरिक जिम्मेदारी से अपने हिस्से का योगदान देगा, तो 2047 तक भारत न केवल विकसित, बल्कि विश्व का नेतृत्वकर्ता राष्ट्र होगा। यह वही भारत होगा जिसके बारे में हम सब गर्व से कहेंगे — “यह नया भारत है, जो सपने नहीं, संकल्प पूरे करता है।”

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28 दिसंबर 2025

सपना वह नहीं जो नींद में आए, जो आपको सोने न दे वही सपना है | प्रेरक ब्लॉग

भूमिका

हर इंसान सपने देखता है। कोई बड़े सपने देखता है तो कोई छोटे। कोई सपनों को भूल जाता है, तो कोई उन्हें जीने लगता है। लेकिन कुछ सपने ऐसे होते हैं जो केवल आँखों में नहीं रहते, वे दिल और दिमाग पर इस कदर हावी हो जाते हैं कि रातों की नींद उड़ जाती है।

ऐसे सपने इंसान को चैन से सोने नहीं देते, आराम करने नहीं देते और बार-बार यह याद दिलाते रहते हैं कि ज़िंदगी में अभी बहुत कुछ करना शेष है।

जब दुनियाँ सुकून की नींद सो रही होती है, तब ऐसे सपनों से जूझ रहा व्यक्ति करवटें बदल रहा होता है—कभी डर में, कभी उम्मीद में तो कभी संघर्ष की योजना बनाते हुए।

Source: Facebook 

यही वह मोड़ है जहाँ यह प्रश्न उठता है— "क्या रात की नींद उड़ा देने वाले सपने हमें कमजोर बनाते हैं या यही सफलता की असली शुरुआत होते हैं?"

सपने क्या होते हैं?

सपने केवल कल्पनाएँ नहीं होते। सपने मनुष्य के अंदर की वह आवाज़ होते हैं जो इंसान को उसकी सीमाओं से बाहर निकलने के लिए मजबूर करते हैं। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब ने कहा था कि "सपने वो नहीं हैं जो आप सोते समय देखते हैं बल्कि सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।"

सपने हमें बताते हैं ;

  • हम जहाँ हैं, वहीं ठहरना नहीं है।
  • हमारे भीतर और भी क्षमता छिपी है। 
  • साधारण जीवन से आगे भी एक दुनियाँ है। 
  • जो व्यक्ति सपनों से डरता है, वह अक्सर आराम को चुनता है।
  • और जो सपनों को जीता है, उसकी नींद अक्सर कुर्बान हो जाती है।

क्यों कुछ सपने रात की नींद उड़ा देते हैं?

१. लक्ष्य का बोझ: जब इंसान अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर हो जाता है, तो उसका दिमाग उसे आराम की अनुमति नहीं देता। हर समय उसके दिमाग में इस तरह के सवाल घूमते रहते हैं, जैसे कि—

  • क्या मैं सही दिशा में जा रहा हूँ?
  • अगर असफल हो गया तब क्या होगा?
  • और समय ही हाथ से निकल गया तो?

यही कुछ ऐसे सवाल हैं जो रातों की नींद को चुरा लेते हैं।

2. असफलता का डर: रात की शांति में डर और गहरा हो जाता है। दिन में तो हम खुद को व्यस्त रख लेते हैं, लेकिन रात में जब अकेले होते हैं, तब मन खुद से पूछता है कि—

  • अगर मैं हार गया तो?
  • समाज क्या कहेगा? 
  • परिवार की उम्मीदें टूट गईं तो?

यह डर नींद को दुश्मन बना देता है।

३. कुछ कर गुजरने की तड़प: कुछ लोग जीवन को केवल जी लेने के लिए नहीं जीते बल्कि उनके भीतर कुछ कर गुजरने की तड़प होती है और उनकी यह तड़प इतनी प्रचंड होती है कि नींद भी उन्हें बाधा लगने लगती है। ऐसे लोग सोचते हैं कि “अगर सो गया, तो समय हाथ से निकल जाएगा।”

क्या नींद उड़ना गलत है?

यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। अगर नींद उड़ने का कारण है— निरंतर चिंता, दूसरों से तुलना, नकारात्मक सोच या बेवजह का डर, तो यह मानसिक नुकसान है।

✅ लेकिन अगर आपकी नींद उड़ने का कारण है— लक्ष्य की स्पष्टता और प्राप्ति, सीखने की भूख, कुछ कर गुजरने का जुनून, आत्मविकास और भविष्य की तैयारी; तब यह आपके सफलता की पहली कीमत है।

इतिहास गवाह है: जो लोग चैन की नींद सोते रहे, वे केवल सपने देखते रहे और जो लोग सपनों के लिए जागते रहे, उन्होंने ही इतिहास लिखा।

  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम— उनके अंदर विकसित भारत का सपना था। 
  • थॉमस एडिसन— सपने को साकार करने के लिए हजारों बार असफल हुए लेकिन हार नहीं मानी। 
  • स्वामी विवेकानंद— शक्तिशाली, वैभवशाली भारत के निर्माण का सपना जिसमें आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आध्यात्म का संगम हो।
  • महात्मा गांधी— देश को गुलामी की जंजीरों से  आज़ादी दिलाने का सपना। 
  • डॉ. भीमराव अंबेडकर— समानता का सपना। 

सपने और संघर्ष का गहरा संबंध

सपने, बिना संघर्ष के नहीं आते और संघर्ष बिना बेचैनी के नहीं होता। जब सपने बड़े होते हैं तब—

  • रास्ते कठिन होते हैं।
  • अकेलापन बढ़ता है। 
  • आलोचना मिलती है। 

लेकिन यही संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है।

रात की बेचैनी: अभिशाप या वरदान?

अभिशाप तब है, जब—

  • आप केवल सोचते भर हैं, करते कुछ नहीं। 
  • डर आपको जकड़ ले। 
  • आत्मविश्वास टूटने लगे। 

वरदान तब है, जब—

  • आप रात में योजना बनाते हैं।
  • सीखते हैं, लिखते हैं और सोच-विचार करते हैं। 
  • अगले दिन कुछ बेहतर बनने की तैयारी करते हैं। 

कैसे पहचानें कि आपके सपने सही हैं?

✔ आपके सपने आपको बेहतर इंसान बना रहे हैं। 

✔ आप खुद से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। 

✔ आप सीखने के लिए हमेशा तत्पर हैं। 

✔ असफलता से भाग नहीं रहे। 

अगर ये लक्षण हैं, तो सच मानिये आपकी नींद उड़ना बेकार नहीं है।

सपनों और स्वास्थ्य के बीच संतुलन कैसे बनाएँ?

१. लक्ष्य लिखिए: जो लक्ष्य काग़ज़ पर होते हैं, वे दिमाग पर बोझ कम डालते हैं।

२. सोचने का समय निर्धारित करें: दिन में सोचने और योजना बनाने का एक समय तय करें और रात में दिमाग को आराम दें।

३. नींद को दुश्मन न बनाएं: याद रखें— थका हुआ दिमाग बड़े सपनों को भी कमजोर बना देता है, इसलिए भरपूर नींद लें।

४. तुलना छोड़ें: दूसरों की सफलता आपकी यात्रा तय नहीं करती इसलिए औरों से अपनी तुलना, बिल्कुल छोड़ दें। 

सपने देखने वालों और भीड़ में अंतर

सपने तो सभी देखते हैं परंतु उससे वास्ता नहीं रखते। लेकिन जो लोग अपने सपनों को जीते हैं वे-

  • त्याग करते हैं। 
  • अकेले चलते हैं, किसी का इंतजार नहीं करते। 
  • लोगों के ताने और आलोचनाओं की परवाह नहीं करते। 
  • और अंत में एक दिन वही इतिहास बनाते हैं।

निष्कर्ष

रातों की नींद उड़ा देने वाले सपने, हर किसी को नहीं आते। यह बेचैनी इस बात का संकेत है कि आप साधारण नहीं रहना चाहते, कुछ अलग करने की तमन्ना रखते हैं। माना कि यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। हाँ, इसमें त्याग है, जूनून है, लेकिन सच में आपका यही त्याग, यही जुनून आगे चलकर सुकून बनता है।

जो सपने आपको सोने नहीं देते, वही आपको जाग्रत जीवन की ओर ले जाते हैं। अगर आपकी नींद आपके सपनों की वजह से उड़ रही है, तो घबराइए मत— "शायद आप सही रास्ते पर हैं।"

FAQ:

Q1. सच्चा सपना किसे कहते हैं?

उत्तर: सच्चा सपना वह होता है जो आपको केवल ख्वाबों में नहीं, बल्कि उसे वास्तविकता में बदलने हेतु कर्म करने पर  मजबूर करता है।

Q2. क्या ज्यादा सपने देखना नुकसानदायक है?

उत्तर: सपने, जब तक आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, तब-तक वे नुकसानदेह नहीं होते। 

Q3. क्या सफलता के लिए नींद त्यागना जरूरी है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। नींद त्यागना जरूरी नहीं है, संतुलन जरूरी है। सफलता के लिए स्मार्ट मेहनत सबसे अहम है।

Q4. क्या हर बेचैनी सफलता की निशानी है?

उत्तर: नहीं, केवल सकारात्मक बेचैनी ही उपयोगी होती है।

Q5. युवा अपने सपनों को कैसे पहचानें?

उत्तर: जो लक्ष्य आपको बार-बार सोचने पर मजबूर करे और वास्तविक रूप देने के लिए आपको बेचैन करे, वही आपका सपना है।

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26 दिसंबर 2025

चलती चक्की काल की पड़े सभी पर चोट (सुंदर कहानी)

यह संसार काल की एक ऐसी चक्की है, जो निरंतर घूम रही है। इसमें न कोई छोटा है, न बड़ा। काल की चोट से न तो अमीर सुरक्षित है, न गरीब। “चलती चक्की काल की पड़े सभी पर चोट” केवल एक कथन नहीं है, बल्कि जीवन की कड़वी सच्चाई है। आज का मनुष्य अपने धन, पद, शक्ति और दिखावे के घमंड में यह भूल जाता है कि काल की मार जब पड़ती है, तो वह किसी का पक्ष नहीं लेती। 

यह ब्लॉग एक बड़ी ही सुंदर कहानी के माध्यम से उसी सत्य को उजागर करता है कि कैसे काल की मार सभी पर पड़ती है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि कालचक्र और ईश्वर को कभी न भूले। 

रोचक कहानी:

सम्राट विक्रमादित्य अन्य राजाओं की तरह विलासी नहीं थे। वे हर समय प्रजा की चिंता में लगे रहते थे। एक दिन प्रातः चार बजे अपने महल से बिल्कुल अकेले किसान के वेष में बाहर निकले। और दूर एक जंगल में जाकर देखा कि एक रीछ एक तरफ से आया और उनके सामने वाली राह पर चलने लगा। उस रीछ ने महाराज को नहीं देखा परंतु महाराज ने उसे देख लिया था। 

थोड़ी दूर चलकर वह रीछ जमीन पर लोटपोट हो गया और एक आलाबाला सोलह-साला सुंदर युवती बनकर एक कुएं पर जा बैठा। सम्राट भी छिपकर यह निराला तमाशा देखने लगे। तबतक कुएं पर दो सिपाही आये। दोनों सगे भाई थे। छुट्टी लेकर घर जा रहे थे। 

युवती ने मुस्कुरा कर बड़े भाई से कहा- तुम्हारे पास कुछ खाने को है? बड़ा सिपाही- जी नहीं।

युवती ने अपने चितवन से उसे घायल करते हुए कहा- मुझे तो बड़ी भूख लगी है।

बड़ा सिपाही उस युवती पर मोहित हो गया और बोला- 'यदि आपकी आज्ञा हो तो समीप के किसी गाँव से ले आऊं?'

युवती- आपको तकलीफ होगी। 

बड़ा- आपके लिए तकलीफ! आपके लिए तो मैं जान तक दे सकता हूँ। 

युवती- तो ले आओ। 

बड़ा भाई चला गया

अब युवती ने छोटे भाई को कटाक्ष मारा और अपने पास बुलाया। वह आकर अदब से बैठ गया। 

युवती- मैं तुम्हीं पर रीझ गयी हूँ। 

छोटा- ऐसा न कहिये। आपने बड़े भाई साहब पर अपनी कृपा-कटाक्ष किया था। इसलिए आप मेरी भावज हुयीं और भावज तो माता समान होती है। 

युवती- तुम बड़े मूर्ख मालूम पड़ते हो।

छोटा- क्यों? 

युवती- तुम्हारे बड़े भाई की उम्र क्या है? 

छोटा- पचास साल। 

युवती- और तुम्हारी? 

छोटा- पैंतीस साल। 

युवती- और मेरी। 

छोटा- आप ही जानें। 

युवती- अपनी बुद्धि से बताओ। 

छोटा - होंगी पंद्रह-सोलह साल की। 

युवती- अब तुम्हीं बताओ कि एक सोलह साल की लड़की पैंतीस साल के युवक को पसंद करेगी या पचास साल के बूढ़े को? 

छोटा सिपाही निरूत्तर हो गया। 

युवती- जो मैं कहूँ, वही करो। तुम मेरे साथ भाग चलो। 

छोटा- कदापि नहीं। आप मेरे भाई से सप्रेम बात कर चुकी हैं। आप भावज हैं और माता के समान हैं। 

युवती- अगर तुम मेरी आज्ञा नहीं मानोगे तो मारे जाओगे। 

छोटा- चाहे कुछ भी हो, इसकी परवाह नहीं। 

थोड़ी देर में पाव भर पेड़ा लेकर बड़ा सिपाही आ गया। 

युवती ने अपनी साड़ी जहाँ-तहाँ से फाड़ डाली थी। उसी साड़ी से मुंह ढंककर वह रोने लगी। 

बड़ा- रोती क्यों हो? यह लो पेड़ा खाओ। 

युवती- पेड़ा उधर कुंएं में डाल दो और तुम भी उसी में कूद मरो।

बड़ा- क्यों? 

युवती- तुम्हारा यह छोटा भाई बहुत दुष्ट है। यदि तुम जल्दी न आते तो इसने मेरा सतीत्व नष्ट कर दिया होता। यह देखो छीना-झपटी में मेरी रेशमी साड़ी तार-तार हो गयी है। 

बड़ा- क्यों बे? तेरी ये हरकत? 

छोटा- भाई साहब! यह झूठ कहती है। 

बड़ा- हूँ! तू सच्चा और वह झूठी है? 

छोटा- मैंने कुछ नहीं किया। 

बड़ा- और यह बिना कारण ही रोती है? साड़ी कैसे फटी? 

छोटा- मैंने कुछ भी नहीं किया। 

बड़ा- अबे साले! तू बड़ा पाजी है। 

छोटा- देखो, गाली मत देना। 

बड़ा- चोरी और उपर से सीनाजोरी? तू भाई नहीं, दुश्मन है। 

इतना कहकर म्यान से तलवार निकाली। छोटा भाई था तो सुशील; परंतु कलयुगी ही था न। वह भी आ गया सिपाहियाना गरमी में। उसने देखा कि बेकसूर होने पर भी उसका भाई एक अनजान और बदचलन औरत के बहकावे में उसे धर्मभ्रष्ट समझ रहा है। उसने भी तलवार सम्हाली। 

दोनों ने पैंतरे बदले और चलने लगीं तलवारें। पांच मिनट में दोनों मरकर गिर गये। युवती हंसी। जमीन पर लोटपोट कर काला सांप बन गयी और आगे को चल दी। सम्राट ने प्रण कर लिया कि इस विचित्र जीव की पूरी कारगुजारी वे अवश्य देखेंगे।

आगे चलकर एक नदी मिली। उसमें एक बड़ी नाव आ रही थी। उसमें तीन सौ आदमी बैठे थे। जब वह नाव बीच धारा में पहुँची, वही काला सांप नाव की सीध में तैर चला। नाव के पास पहुंचा और चिटककर नाव में जा गिरा। लोगों ने जब यह तमाशा देखा तो मारे डर के, सभी नाव के एक तरफ हो गये। नाव उलट गयी और सब डूबकर मर गए। वह सांप फिर लौटा और जमीन पर लोटने लगा। 

सम्राट ने सोचा- अजब लीला है। 

अबकी बार वह एक वृद्ध ज्योतिषी बन गया, सफेद दाढ़ी, ललाट पर चंदन और हाथ में पत्रा लिए। सम्राट ने आगे दौड़कर उसके पैर पकड़ लिए। 

वह- तुम कौन? 

सम्राट- मैं एक राजा हूँ। 

वह- क्या चाहते हो? 

सम्राट- सुबह जब आप रीछ के रूप में थे, तबसे आपके पीछे लगा हूँ। आपने युवती और सांप बनकर जो करिश्मा किये हैं, वह सब मैंने देखा है। यह आपका चौथा रूप है। 

वह- अच्छा तो तुम क्या जानना चाहते हो? 

सम्राट- यह कि आप कौन हैं? 

वह- तुम इस बवाल में मत पड़ो। अपने रास्ते जाओ। 

सम्राट- नहीं, स्वामिन्! जबतक आपका परिचय प्राप्त नहीं कर लूँगा तबतक एक पग नहीं बढ़ूंगा। 

वह- मैं महाकाल हूँ और लोगों के विनाश के काम में लगा रहता हूँ। 

सम्राट- आप जिसे चाहते हैं, उसे साफ कर डालते हैं? 

महाकाल- नहीं स्वतंत्र नहीं हूँ। परमात्मा का एक तुच्छ सेवक हूँ। 

सम्राट- अच्छा तो मेरी मौत कब आयेगी? 

महाकाल- यह बताने की आज्ञा नहीं है। तुम अभी बहुत दिन जीवित रहोगे और तुम्हारे द्वारा ईश्वर बहुत से परोपकार के कार्य करवायेंगे। 

सम्राट- अब आप किसकी घात में हैं? 

महाकाल- यह तुम्हारे अधिकार से बाहर का प्रश्न है। 

सम्राट- आपने रीछ बनकर क्या किया था? 

महाकाल- एक आदमी पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काट रहा था। उसे पेड़ पर से गिराने के लिए रीछ बनकर पेड़ पर चढ़ गया और गिराकर मारा। 

सम्राट- आप विविध प्रकार के रूप क्यों बनाते हैं? 

महाकाल- जिसकी मौत जिस रूप में लिखी होती है, उसे उसी बहाने से मारता हूँ। 

सम्राट- क्या कोई आपके कराल हाथ से बचा भी है? 

महाकाल- कोई-कोई योगी बच गये, पारब्रह्म की ओट। चलती चक्की काल की, पड़े सभी पर चोट।। 

सम्राट- क्या करने से काल की चोट नहीं होती? 

महाकाल- परमात्मा की शरणागति से। परमात्मा अपने भक्त का काल अपने हाथ में ले लेते हैं। उस पर मेरा कोई अधिकार नहीं रह जाता। 

सम्राट- आपका आज का यह किस्सा किसी को सुनाऊँ तो क्या वह सुनेगा? और क्या विश्वास करेगा? 

महाकाल- नहीं। अगर सुनेंगे तो भी गप मानेंगे। लोग दिलबहलाव के किस्से सुनते हैं। जिन कहानियों से दिमाग को खुराक मिलती है, उसे नहीं सुनते। 

सम्राट- सचमुच यह जगत विचित्रताओं की रंगभूमि है। इस जगत को कोई नहीं जानता है, यद्यपि सभी यही समझते हैं कि वे इस जगत को जानते हैं। आपको मैं प्रणाम करता हूँ। अब आप जाइये। आपके दर्शन से यह उपदेश मिला कि, "काल और ईश्वर को कभी नहीं भूलना चाहिए।"

कहानी का स्रोत: गीताप्रेस से प्रकाशित पुस्तक, "एक लोटा पानी"

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